NCERT Class 10 Sparsh Chapter 7 Poem Explanation तोप

NCERT Class 10 Sparsh Chapter 7 Poem Explanation तोप

Sparsh Chapter 7 Poem Explanation तोप

NCERT Class 10 Sparsh Chapter 7 Poem Explanation तोप, (Hindi) exam are Students are taught thru NCERT books in some of the state board and CBSE Schools. As the chapter involves an end, there is an exercise provided to assist students to prepare for evaluation. Students need to clear up those exercises very well because the questions inside the very last asked from those.

Sometimes, students get stuck inside the exercises and are not able to clear up all of the questions.  To assist students, solve all of the questions, and maintain their studies without a doubt, we have provided a step-by-step NCERT poem explanation for the students for all classes.  These answers will similarly help students in scoring better marks with the assist of properly illustrated Notes as a way to similarly assist the students and answer the questions right.

NCERT Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7 Poem Explanation तोप

 

पाठ की रूपरेखा

प्रस्तुत कविता में एक तोप का वर्णन किया गया है , जो 1857 ई . के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में प्रयोग में लाई गई थी । यह तोप अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचार की प्रतीक है । इस तोप को अब कंपनी बाग में एक विरासत की भाँति सँभालकर रखा गया है । यह तोप आने – जाने वालों को यह बताती है कि उसने बड़े – बड़े वीरों की धज्जियाँ उड़ा दी थी । आज उस तोप की स्थिति यह है कि या तो उस पर छोटे बच्चे सवार होकर खेल – खेलते हैं या चिड़ियाँ बैठी आपस में गपशप करती हैं । कई बार ऐसा होता है कि कुछ गौरैयाँ भी उस तोप में घुस जाती हैं । इससे यह बात प्रमाणित होती है कि तोप चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो , एक – न – एक दिन उसे शांत होना ही पड़ता है । इसी प्रकार अत्याचार करने वाली प्रबल शक्तियों को भी एक दिन पराजय का मुँह देखना पड़ता है ।

 

काव्यांशों की व्याख्या

काव्यांश 1

कंपनी बाग के मुहाने पर

धर रखी गई है यह 1857 की तोप

इसकी होती है बड़ी सम्हाल , विरासत में मिले

कंपनी बाग की तरह

साल में चमकाई जाती है दो बार |

सुबह – शाम कंपनी बाग में आते हैं बहुत से सैलानी

उन्हें बताती है यह तोप

कि मैं बड़ी जबर

उड़ा दिए थे मैंने

अच्छे – अच्छे सूरमाओं के धज्जे

अपने ज़माने में ।

शब्दार्थ

कंपनी बाग – ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बनाए गए बाग

मुहाने – प्रवेश द्वार पर

धर रखी — रखी गई

सम्हाल – देखभाल

विरासत – पूर्व पीढ़ियों से प्राप्त वस्तुएँ

सैलानी – दर्शनीय स्थलों पर आने वाले यात्री , पर्यटक

जबर- ज़बरदस्त , शक्तिशाली

सूरमा – वीर

धज्जे- चिथड़े – चिथड़े करना

भावार्थ – कवि कहता है कि कंपनी बाग के मुख्य द्वार पर प्रवेश करते ही एक तोप रखी हुई दिखाई देती है । इस तोप को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में प्रयोग किया गया था । इस तोप तथा कंपनी बाग की बहुत देखभाल की जाती है । इसे अपने पुरखों द्वारा मिली धरोहर के रूप में सजाया – सँवारा जाता है । इस तोप को एक वर्ष में दो बार खूब चमकाया जाता है ।

इस कंपनी बाग में हर रोज़ सुबह और शाम के समय बहुत से सैलानी घूमने के लिए आते हैं । तब यह तोप उन सभी को बताती है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में मैंने ज़बरदस्त कार्य किया था और अच्छे – अच्छे शूरवीरों के चिथड़े – चिथड़े उड़ा दिए थे । इस प्रकार यह तोप अपनी गौरव गाथा बाग में आने – जाने वाले सभी लोगों को बताती है ।

काव्य सौंदर्य

( i ) भाषा अत्यंत सरल एवं सहज है , लेकिन अत्यंत प्रभावोत्पादक होने के कारण भावाभिव्यक्ति में पूर्णतः सक्षम है ।

( ii ) इसमें चित्रात्मक शैली का प्रयोग किया गया है , जिससे चित्रण अत्यंत जीवंत हो गया है ।

( iii ) यह छंदमुक्त शैली में लिखी गई कविता है ।

( iv ) ‘ अच्छे – अच्छे ‘ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है ।

काव्यांश 2

अब तो बहरहाल

छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिंग हो

तो उसके ऊपर बैठकर

चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप

कभी – कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैं

खास कर गौरैयें

वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप

एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद |

शब्दार्थ

बहरहाल – फिलहाल , इन दिनों , अब

फ़ारिग – खाली , मुक्त , फुरसत मिलना

अकसर – प्रायः

गपशप – बातें

शैतानी – शरारत

दरअसल – वास्तव में

भावार्थ – कवि कहता है कि पहले यह तोप कितनी भी विनाशकारी क्यों न रही हो , किंतु आजकल तो यह खिलौने के रूप में काम कर रही है । अब बच्चे इस तोप पर बैठकर घुड़सवारी का आनंद लेते हैं । जब कभी इस पर बच्चे सवारी नहीं करते , अगर वह खाली होती है , तो उस समय चिड़ियाँ इस पर बैठकर आपस में गपशप करती हैं । कई बार तो ऐसा भी होता है कि कुछ पक्षी शरारत करते हुए इस तोप के मुँह के भीतर भी घुस जाते हैं , विशेष तौर पर गौरैयाँ तो इससे बिलकुल भयभीत नहीं होतीं । इस तोप पर चिड़ियाँ गपशप करके , गौरैयाँ तोप के मुँह में भयहीन होकर घुसकर तथा खेलने वाले बच्चे इस पर सवारी करके मानो यह बताते हैं कि चाहे तोप कितनी भी बड़ी और शक्तिशाली क्यों न हो , एक न एक दिन उसका मुँह बंद हो ही जाता है । कवि इस बात को स्पष्ट करना चाहता है कि किसी समस्या का समाधान विनाशकारी तोप के पास तो बिलकुल नहीं है ।

काव्य सौंदर्य

( i ) इसकी भाषा अत्यधिक सरल एवं सहज होते हुए भी प्रभावोत्पादक है , जो भावों की अभिव्यक्ति करने में पूर्णत : सक्षम है ।

( ii ) यथार्थ एवं जीवंत चित्रण करने के लिए चित्रात्मक शैली का प्रयोग किया गया है ।

( iii ) यह कविता छंदमुक्त शैली में लिखी है , जो नई कविता की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है ।

( iv ) ‘ कभी – कभी ‘ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है ।

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