NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी

Class 10 Hindi Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी, (हिंदी)परीक्षा में राज्य बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों में से कुछ में एनसीईआरटी की किताबों के माध्यम से छात्रों को पढ़ाया जाता है के रूप में अध्याय एक अंत शामिल है, वहां एक अभ्यास के लिए छात्रों को मूल्यांकन के लिए तैयार सहायता प्रदान की है छात्रों को उन अभ्यासों को बहुत अच्छी तरह से स्पष्ट करने की जरूरत है क्योंकि बहुत पिछले उन लोगों से पूछा भीतर सवाल

कई बार, छात्रों के अभ्यास के भीतर अटक जाते है और सवालों के सभी स्पष्ट करने में सक्षम नहीं हैं छात्रों को सभी प्रश्नों को हल करने और अपनी पढ़ाई को संदेह के साथ बनाए रखने में सहायता करने के लिए, हमने सभी कक्षाओं के लिए छात्रों के लिए स्टेप एनसीईआरटी सॉल्यूशंस द्वारा कदम प्रदान किए हैं। इन उत्तरों को इसी तरह छात्रों की सहायता और सवालों का सही जवाब देने के तरीके के रूप में ठीक से सचित्र समाधानों की सहायता से बेहतर अंक स्कोरिंग में छात्रों की मदद मिलेगी

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी

Class 10 Hindi Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

 

प्रश्न 1. लेखिका के व्यक्तित्व पर किन – किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा ?

उत्तर- लेखिका के व्यक्तित्व को प्रमुख रूप से दो व्यक्तियों ने गहराई से प्रभावित किया । एक थे उसके पिता और दूसरी थीं हिन्दी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ।

पिता का प्रभाव – लेखिका के पिता ने लेखिका के व्यक्तित्व को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही रूपों में प्रभावित किया । उन्होंने बेटी को राजनैतिक बहसों में शामिल करके उसे जागरूक बनाया । उसे रसोई तथा घर के काम से दूर रखकर उसकी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान किया । कॉलिज में छात्राओं पर उसके प्रभाव की प्रशंसा करके उसे निर्भीक और नेतृत्व कुशल बनने को प्रोत्साहित किया । इसी के साथ उन्होंने अपने कठोर नियन्त्रण में उसमें हीनता की भावना को भी जन्म दिया । पिता से निरन्तर मतभेद रहने के कारण वह हठी और विद्रोही भी बन गई ।

शीला अग्रवाल का प्रभाव – लेखिका की हिन्दी की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल एक देशभक्त और क्रान्तिकारी विचारों वाली महिला थीं । उन्होंने लेखिका को अपनी जोशीली बातों से घर की चाहरदीवारी से बाहर आकर स्वतन्त्रता आन्दोलन में खुलकर भाग लेने की प्रेरणा दी । शीला जी ने लेखिका को आत्मविश्वासी और स्वतन्त्र निर्णय लेने वाली बनाया ।

प्रश्न 2. इस आत्मकथा में लेखिका के पिता ने रसोई को ‘ भटियारखाना ‘ कहकर क्यों सम्बोधित किया है ?

उत्तर- भटियारखाना अर्थात् जहाँ भट्टी जलती रहती है ……. वे मानते थे कि वहाँ कार्य करने से उनकी बेटी मन्नू की प्रतिभा और क्षमता नष्ट हो जाएगी । ……… व्यक्तित्व का विकास न हो पाएगा । [ सी.बी.एस.ई. अंक योजना 2012 ] 2

व्याख्यात्मक हल :

‘ भटियारखाना ‘ शब्द का अर्थ वह स्थान है जहाँ भट्टी या चूल्हा जलता रहता है । खाना बनाने का काम करने वालों को भटियारा कहा जाता है । इस शब्द का सांकेतिक अर्थ है – वह स्थान जहाँ असभ्य लोग शोरगुल मचाते रहते हैं , अव्यवस्था छाई रहती है । पाठ में इस शब्द का पहला अर्थ ग्रहण किया गया है । रसोई घर में सिर्फ खाना बनाने का काम चलता रहता है । रसोईघर में व्यस्त रहने वाली लड़कियों की प्रतिभा व्यर्थ नष्ट हो जाती है । लेखिका के पिता नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी रसोई तक ही सीमित रह जाए । वह उसकी प्रतिभा और मौलिक गुणों को प्रकाशित होते देखना चाहते थे । उसे जागरूक बनाना चाहते थे । इसीलिए रसोई को उन्होंने भटियारखाना कहकर बेटी को उससे दूर रहने को कहा था ।

प्रश्न 3. वह कौन – सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर ?

उत्तर- आशा के प्रतिकूल व्यवहार ।

डाँटने की बजाए प्रशंसा करने लगे ।

लेखिका पिता जी के क्रोध के डर से पड़ोस में बैठ गई थी । [ सी.बी.एस.ई. अंक योजना , 2015 ] 2

व्याख्यात्मक हल :

कॉलेज की प्रिंसिपल लेखिका की नेतागिरी से बहुत परेशान थी । उसने एक दिन लेखिका के पिता को कॉलेज में बुलवाया । पिता को लगा कि उनकी पुत्री ने कॉलेज में अवश्य कोई गम्भीर शरारत की है तथा अब उनको प्रिंसिपल के सामने शर्मिन्दा और अपमानित होना पड़ेगा । इन विचारों के आने से वह घबरा गए और बड़े तनाव में कॉलेज पहुँचे । प्रिंसिपल ने लेखिका के सारे कारनामे पिता को सुनाए । उन्होंने कहा कि उन्हें कॉलेज चलाना मुश्किल हो रहा है । बेटी की इस वीरगाथा का पिता पर उल्टा ही प्रभाव पड़ा । उन्हें अपनी पुत्री के रौब – दाब पर बड़ा गर्व अनुभव हुआ । उन्होंने प्रिंसिपल के सामने खेद प्रकट करने के बजाय कह दिया कि यह आन्दोलन तो वक्त की पुकार है । किसी को उससे जुड़ने से कैसे रोका जा सकता है ? घर आकर उन्होंने बड़े गर्व के साथ लेखिका को सारी बातें बताईं । बेटी के लिए उनके हृदय में प्रशंसा का भाव उमड़ रहा था । उनका कंठ गद्गद् हो रहा था । यह देख और सुनकर लेखिका चकित रह गई । उसने तो सोचा था कि कॉलेज से लौटकर पिता उस पर खूब बरसेंगे । हो सकता था कि उसका कॉलेज जाना ही बंद कर दें , परन्तु इसके विपरीत अपनी प्रशंसा सुनकर उसे अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था ।

प्रश्न 4. लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए ।

उत्तर- पिता स्त्रियों की आज़ादी के मामले में संकुचित विचारों के थे पर मन्नू जी ऐसी नहीं थीं ।

पिता को पढ़ने – लिखने की स्वतंत्रता स्वीकार्य थी पर राजनीतिक आंदोलनों में भाग लेना पसंद नहीं था । मन्नू भंडारी यह सब करना सही मानती थीं । [ सी.बी.एस.ई. अंक योजना , 2019 ] 2

व्याख्यात्मक हल :

मनू भंडारी की अपने पिता से वैचारिक टकराहट बचपन में आरंभ हुई वह राजेंद्र से विवाह करने तक चलती रही | बचपन में पिता जी के अनजाने- अनचाहे व्यवहार ने लेखिका में हीन ग्रंथि का संचार किया । लेखिका से दो साल बड़ी बहन सुशीला का रंग गोरा था और लेखिका काली थी । पिता जी हर बात में उन दोनों की तुलना करते रहते थे जिसने लेखिका को शक्की स्वभाव का बना दिया और वे बात – बात पर मन्ना जाती थीं । यह था टकराहट का पहला कारण |

दूसरा कारण , यह था कि पिताजी चाहते थे कि लेखिका घर में ही रहे और बाहर सड़को पर भाग न ले किंतु लेखिका का लहु लाता बन गया था और उसे आज़ादी के दायरे में चलना स्वीकार न था | इससे उन दोनों के मदरा वैचारिक टकराहट होती जाकर थी ।

प्रश्न 5 इस आत्मकथा के आधार पर स्वाधीनता आन्दोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए ।

उत्तर- इस आत्मकथा में लेखिका ने सन् 1946-47 के मध्य भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन की एक झलक प्रस्तुत की है । उस समय सारा देश आज़ादी की चाह में मतवाला हो रहा था । समाज का कोई भी वर्ग इस स्वाधीनता के यज्ञ में अपनी आहूति डालने में पीछे नहीं रहना चाहता था । विशेष रूप से देश का युवा वर्ग तो पूरी तरह अन्दोलन को समर्पित था । देश के हर छोटे – बड़े नगर में प्रभातफेरी , जुलूस , हड़तालें , भाषण , नारे गाते युवक – युवतियाँ- यही दृश्य दिखाई देते थे । छात्रों ने स्कूलों , कॉलेजों का बहिष्कार सा कर दिया था लेखिका के शब्दों में उस समय सारा देश आजादी की उत्तेजना से खौल रहा था ।

लेखिका ने भी अपनी सम्पूर्ण क्षमता से इस आन्दोलन में भाग लिया । सबसे पहले उसने अपने कॉलेज की छात्राओं को आन्दोलन में सम्मिलित किया । कॉलेज प्रशासन की धमकियों की परवाह न करते हुए उसने छात्राओं में देश – प्रेम और आजादी की भावना भर दी लेखिका के पिता को लेखिका का सक्रिय रूप से आन्दोलन में भाग लेना पसन्द नहीं था लेकिन लेखिका ने पिता के विरोध की उपेक्षा करते हुए आन्दोलन में पूरे जोश से भाग लिया । वह अन्य लड़कों के साथ शहर में नारे लगाती , हड़ताल कराती और भाषण देती घूमती थी । उसके धुआँधार भाषण से लोगों की भीड़ में उत्साह भर जाता था ।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 6. लेखिका ने बचपन में अपने भाईयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किन्तु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था । क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं , अपने परिवेश के आधार पर लिखिए ।

उत्तर- बचपन में लेखिका ने पतंग उड़ाना , माँजा सूतना , गिल्ली – डंडा आदि लड़कों के खेल भी खेले थे । परन्तु ये सब घर की सीमा में ही किया था । उस समय घर की सीमा पड़ोस तक विस्तृत थी आज का सामाजिक परिवेश लेखिका के बचपन की तुलना में बहुत अधिक बदल चुका है । नगरों और विशेषकर महानगरों में लड़कियाँ अब घर की चारदीवारी में सीमित नहीं रहतीं । वे घरों से बाहर निकलकर खेल मनोरंजन , व्यवसाय आदि गतिविधियों में खुलकर भाग लेती हैं । उनको अपना कैरियर चुनने की स्वतंत्रता है । कभी – कभी तो आज़ाद ख्यालों में वे लड़कों से भी आगे दिखाई देती हैं । लेकिन गाँवों , कस्बों और छोटे शहरों में आज भी लड़कियों पर कुछ पाबंदियाँ दिखाई देती हैं । आज का समाज निरन्तर बदल रहा है उसमें प्रगतिशीलता बढ़ रही है । किन्तु अब भी उसमें परम्परा और पुरानी बातों के प्रति मोह बना हुआ है । अब भी लड़कियों को नियन्त्रण में रखा जाता है । उनको लड़कों के समान आज़ादी प्राप्त नहीं है ।

प्रश्न 7. मनुष्य के जीवन में आस – पड़ोस का बहुत महत्व होता है । परन्तु महानगरों में रहने वाले लोग प्राय : ‘ पड़ोस कल्चर ‘ से वंचित रह जाते हैं । इस बारे में अपने विचार लिखिए ।

उत्तर- मनुष्य के सामाजिक जीवन में आस – पड़ोस के महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता । पड़ोसी भावना से व्यक्ति में आत्मीयता और सुरक्षा की भावना रहती है । आड़े वक्त पर सहृदय पड़ोसी ही काम आते हैं किन्तु आज की महानगरीय जीवन शैली ने लोगों को ‘ फ्लैट – कल्चर ‘ का अनुयायी बना दिया है । भौतिक सुख – सुविधाएँ जुटाने के लिए लोग व्यस्त रहने को बाध्य हो गए हैं । पति – पत्नी दोनों को नौकरी पर जाना पड़ता है । सुबह निकलकर शाम को घर आते हैं

महानगरों की इन परिस्थितियों और विवशताओं ने लोगों को ‘ पड़ोस कल्चर ‘ से वंचित कर दिया है । एक ही भवन में रहने वाले परिवारों में भी अपरिचय बना रहता है । अपने मतलब से या विशेष परिस्थितियों में ही पड़ोसी से संवाद होता है । इसके फलस्वरूप फ्लैट निवासियों को प्रायः एकाकीपन , असहायता और असुरक्षा की भावना का सामना करना पड़ता है ।

बच्चे भी ‘ फ्लैट – कल्चर ‘ के दुष्प्रभाव से नहीं बच पाते । माता – पिता उनसे स्कूल – कॉलेजों में सर्वश्रेष्ठ स्थान पाने की अपेक्षा रखते हैं । उनके बढ़िया कैरियर की चिंता में ग्रस्त रहते हैं । इस कारण बच्चों पर पढ़ाई का बोझ सवार रहता है और वे कोचिंग या फ्लैट के बंधक बने रहते हैं ।

प्रश्न 8. लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए ।

उत्तर- लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यास हैं – जैनेन्द्र के ‘ सुनीता ‘ और ‘ त्याग – पत्र ‘ , ‘ अज्ञेय ‘ के ‘ नदी के द्वीप ‘ तथा ‘ शेखर : एक जीवनी ‘ , भगवतीचरण वर्मा का ‘ चित्रलेखा ‘ तथा शरत् और प्रेमचंद्र के कुछ उपन्यास

इन उपन्यासों को छात्र अपने पुस्तकालय से प्राप्त करके पढ़े ।

प्रश्न 9. आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए ।

उत्तर- छात्र स्वयं लिखें ।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 10. इस आत्मकथा में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है । रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ –

( क ) इस बीच पिताजी के एक निहायत दकियानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिताजी की लू उतारी

( ख ) वे तो आग लगाकर चले गए और फिर पिताजी सारे दिन भभकते रहे ।

( ग ) बस अब यही रह गया है कि लोग घर आकर थू – थू करके चले जाएँ ।

( घ ) पत्र पढ़ते ही पिता जी आग-बबूला हो गए ।

उत्तर-

( क ) आशीष शर्मा को जब बेटे के स्कूल से गायब रहने का पता चला तो उन्होंने सारे छात्रों के सामने उसकी अच्छी तरह ‘ लू उतारी ‘ ।

( ख ) आज के बाद मेरे घर में कदम मत रखना तुम मेरे परिवार में आग लगाकर ‘ मजा लेना चाहते हो ।

( ग ) बूढ़े माता – पिता को घर से निकाल देने पर सब लोग बेटे – बहू पर ‘ थू – थू कर ‘ रहे थे ।

( घ ) बेटी को एक लड़के के साथ घूमते देख पिताजी ‘ आग – बबूला ‘ हो गए ।

पाठेतर सक्रियता

प्रश्न 1 . इस आत्मकथ्य से हमें यह जानकारी मिलती है कि कैसे लेखिका का परिचय साहित्य की अच्छी पुस्तकों से हुआ । आप इस जानकारी का लाभ उठाते हुए अच्छी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने का सिलसिला शुरू कर सकते हैं । कौन जानता है कि आपमें से ही कोई अच्छा पाठक बनने के साथ – साथ अच्छा रचनाकार भी बन जाए ।

उत्तर- छात्र स्वयं पुस्तकें पढ़े ।

प्रश्न 2 . लेखिका के बचपन के खेलों में लँगड़ी टाँग , पकड़म – पकड़ाई और काली – टीलो आदि शामिल थे । क्या आप भी यह खेल खेलते हैं । आपके परिवेश में इन खेलों के लिए कौन – से शब्द प्रचलन में हैं ? इनके अतिरिक्त आप जो खेल खेलते हैं , उन पर चर्चा कीजिए ।

उत्तर- हमारे परिवेश में इन खेलों के लिए प्रचलित शब्द हैं – ‘ लँगड़ी टाँग ‘ के लिए लँगड़ी दौड़ ‘ , ‘ पकड़म – पकड़ाई ‘ के लिए ‘ आँख मिचौली ‘ , ‘ छुआ – छुऔल ‘ इत्यादि । इसके अतिरिक्त हम कबड्डी ऊँची कूद , लम्बी कूद , दौड़ , बाधा – दौड़ , गिल्ली – डंडा , गोली टीच आदि खेल खेलते हैं । विदेशी खेलों में फुटबाल , वालीबॉल , हॉकी , क्रिकेट , बैडमिंटन , टेनिस आदि खेल भी हम खेलते हैं ।

प्रश्न 3 . स्वतन्त्रता आन्दोलन में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही है । उनके बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए और उनमें से किसी एक पर प्रोजेक्ट तैयार कीजिए ।

उत्तर- छात्र स्वयं तैयार करें ।

 

एनसीईआरटी सॉल्यूशंस के लाभ

एनसीईआरटी के कक्षा 10 समाधान में अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु हैं, और प्रत्येक अध्याय के लिए, प्रत्येक अवधारणा को सरल बनाया गया है ताकि उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम प्राप्त करने की संभावनाओं को याद रखना और बढ़ाना आसान हो सके। परीक्षा की तैयारी के संदर्भ यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं कि ये समाधान आपको परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद कर सकते हैं ।

  1. यह छात्रों को प्रत्येक अध्याय में कई समस्याओं को हल करने में मदद करता है और उन्हें अपनी अवधारणाओं को और अधिक सार्थक बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  2. कक्षा 10 समाधानों के लिए एनसीईआरटी समाधान आपको अपने ज्ञान को अपडेट करने और अपनी अवधारणाओं को परिष्कृत करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि आप परीक्षा में अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकें।
  3. ये समाधान सबसे अच्छी परीक्षा सामग्री हैं, जिससे आप अपने सप्ताह और अपनी ताकत के बारे में अधिक जानने की अनुमति देते हैं। परीक्षा में अच्छे परिणाम पाने के लिए जरूरी है कि आप अपनी कमजोरियों को दूर करें।
  4. परीक्षा में ज्यादातर प्रश्न एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों के समान तरीके से तैयार किए जाते हैं । इसलिए, छात्रों को विषय को बेहतर ढंग से समझने के लिए प्रत्येक अध्याय में समाधानों की समीक्षा करनी चाहिए।
  5. यह निशुल्क है।

कक्षा 10 परीक्षा की तैयारी के लिए टिप्स और रणनीतियां

  1. अपने पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रम की योजना बनाएं और संशोधन के लिए समय बनाएं
  2. परीक्षा की तैयारी के लिए हर बार अपनी अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए cbsestudyguru वेबसाइट पर उपलब्ध एनसीईआरटी समाधान का उल्लेख करें ।
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  4. यह अपने शिक्षकों या एलेक्स (एक अल अध्ययन बॉट) के साथ परीक्षा से पहले अपने सभी संदेहों को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण है ।
  5. जब आप किसी चैप्टर को पढ़ते या पढ़ते हैं तो एल्गोरिदम फॉर्मूले, प्रमेय आदि लिखें और परीक्षा से पहले उनकी जल्दी समीक्षा करें ।
  6. अपनी अवधारणाओं को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें।
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