NCERT Class 9 Hindi Kritika Chapter 2 Summary मेरे संग की औरते

NCERT Class 9 Hindi Kritika Chapter 2 Summary मेरे संग की औरते

Hindi Kritika Chapter 2 Summary मेरे संग की औरते

NCERT Class 9 Hindi Kritika Chapter 2 Summary मेरे संग की औरते, (Hindi) exam are Students are taught thru NCERT books in some of the state board and CBSE Schools. As the chapter involves an end, there is an exercise provided to assist students to prepare for evaluation. Students need to clear up those exercises very well because the questions inside the very last asked from those.

Sometimes, students get stuck inside the exercises and are not able to clear up all of the questions.  To assist students, solve all of the questions, and maintain their studies without a doubt, we have provided step-by-step NCERT Summary for the students for all classes.  These answers will similarly help students in scoring better marks with the assist of properly illustrated Notes as a way to similarly assist the students and answer the questions right.

 

NCERT Class 9 Hindi Kritika Chapter 2 Summary मेरे संग की औरते

 

पाठ का सारांश

लेखिका द्वारा लिखा गया यह एक संस्मरणात्मक गद्य है , जिसमें लेखिका ने अपने परिवार की औरतों – अपनी नानी , अपनी माँ तथा अपनी चार बहनों के बारे में बताया है । उसने तत्कालीन घरेलू , आर्थिक , सामाजिक तथा शैक्षिक स्थिति परिचित कराया है ।

लेखिका अपनी नानी के बारे में कहती है कि वह अपनी नानी को नहीं देख सकी थी , क्योंकि उनकी मृत्यु उनकी ( लेखिका की ) माँ की शादी से पहले ही हो गई थी । उनकी नानी परंपराओं को मानने वाली , अनपढ़ तथा परदा करने वाली महिला थीं । उनके पति शादी के तुरंत बाद उन्हें घर पर छोड़कर बैरिस्ट्री पढ़ने विलायत चले गए । जब कैंब्रिज विश्वविद्यालय से वकालत की डिग्री लेकर वापस आए तो उनके आचार – विचार में अंग्रेज़ियत साफ़ झलकती थी । नानी इन बातों से दूर रहकर अपना जीवन अपने ढंग से जीती थीं । उन्होंने कभी भी अपनी इच्छा का इज़हार अपने पति के सामने नहीं किया । अपनी मृत्यु निकट जानकर उन्होंने अपने पति के स्वतंत्रता सेनानी मित्र प्यारेलाल शर्मा को बुलवाकर कहा कि उनकी बेटी का रिश्ता अपने जैसे किसी स्वतंत्रता सेनानी के परिवार से करा दें । उनकी इच्छानुसार लेखिका की माँ का विवाह आज़ादी के आंदोलन में भाग लेने वाले एक होनहार लड़के से किया गया । इस कारण उन्हें सादा जीवन जीना पड़ा । वे रात में जागकर खादी की साड़ी बाँधने का अभ्यास करतीं । वैसे भी लेखिका की माँ कमज़ोर शरीर की | वे घर में किताबें पढ़तीं , साहित्य चर्चा करतीं , संगीत सुनतीं । एक तो माँ झूठ नहीं बोलती थीं , दूसरे लोगों की गोपनीय बातें अपने तक ही सीमित रखती थीं , इस कारण उनका घर और बाहर दोनों ही जगह मान – सम्मान था ।

ऐसे ही लेखिका की परदादी थीं जो सदैव लीक से हटकर काम करती थीं । वे फालतू सामान एकत्र करने के बजाए उन्हें दान में दे दिया करती थीं । उन्होंने अपनी बहू के गर्भवती होने पर मंदिर में भगवान से लड़की पैदा होने की मन्नत माँगी और यह बात सभी को बता दी । उनकी बार – बार की मन्नत से भगवान ने अफरा – तफरी में आकर एक के बाद एक पाँच कन्याएँ उतार दीं और बेटा केवल एक ।

एक बार हवेली के मर्द किसी बारात में गए थे और औरतें रतजगा कर रही थीं । तभी एक चोर उसी कमरे में घुस आया , जिसमें परदादी सो रही थीं । कुछ आहट होते ही परदादी की आँख खुल गई । चोर डर गया तभी परदादी ने चोर से पानी लाने को कहा । पानी लाते समय चोर को पकड़ लिया गया और उनके सामने लाया गया । उन्होंने पानी पीकर आधा पानी चोर को पिलाया और उसे बेटा मानते हुए चोरी छोड़ खेती करने की नेक सलाह दी । उनकी सलाह मानकर चोर ने चोरी करना छोड़ दिया और खेती करने लगा ।

15 अगस्त , 1947 को देश में जब आज़ादी का जश्न मनाया जा रहा था , तब लेखिका को टाइफाइड बुखार था । डॉक्टर की सलाह के कारण वह बाहर न जा सकी । उसके पिता ने उसे ‘ ब्रदर्स कारामजोव ‘ नामक उपन्यास दिया , जिसके कई अंशों को लेखिका ने बार – बार पढ़ा ।

लेखिका अपनी नानी , माँ और परदादी के बारे में बताने के बाद अपनी बहनों के बारे में कहती है कि उसकी सबसे बड़ी बहन थी मंजुल , जिसे घर में रानी कहते थे । उसने शादी के बाद मंजुलभगत नाम से लिखना शुरू कर दिया । दूसरे नंबर की बहन ने शादी के बाद मृदुला गर्ग नाम से लिखना शुरू कर दिया । इसके बाद की दो बहनें रेणु और चित्रा लेखन कार्य से बची रहीं । सबसे छोटी बहन अचला अंग्रेजी में लिखने लगी तथा छोटा भाई राजीव हिंदी में लिखने लगा । उनकी तीसरी बहन रेणु बी ० ए ० नहीं करना चाहती थी , परंतु पिता जी और घरवालों का मन रखने के लिए उसने किसी तरह बी.ए. कर लिया । उनकी बहन रेणु स्वयं कम दूसरों को ज़्यादा पढ़ाती थी । उसके अपने अंक कम , किंतु उससे पढ़ने वालों के अंक अधिक आते थे । वह दृढ़ निश्चयी थी । उसने अपनी पसंद के लड़के से ही शादी की सबसे छोटी बहन अचला ने पत्रकारिता में प्रवेश लिया और पिता जी की पसंद से शादी कर ली । बाद में वह भी लेखनकार्य में संलग्न हो गई ।

विवाह के बाद लेखिका को बिहार के डालमियाँ नगर जैसे पिछड़े स्थान पर रहना पड़ा । यहाँ सिनेमा देखते समय पति – पत्नी अलग – अलग बैठते थे । उन्होंने वहाँ मर्दों – औरतों को एक साथ नाटक करने के लिए राजी कर लिया और नाटकों से अकाल राहत कोष के लिए धन एकत्र किया । इसके बाद लेखिका कर्नाटक के बाँगलकोट में रहीं । वहाँ उन्होंने कैथोलिक विशप से स्कूल खोलने की प्रार्थना की , जिसे उन्होंने अनसुना कर दिया । बाद में अनेक लोगों की मदद से उन्होंने ‘ अंग्रेज़ी- कन्नड़ – हिंदी ‘ सिखाने वाला स्कूल खोला तथा स्कूल को कर्नाटक सरकार से मान्यता भी दिलवाई । लेखिका सोचती थीं कि शहर में अकेले मंज़िल की ओर बढ़ते जाने का मज़ा कुछ और ही है ।

पाठ के शब्दार्थ

ज़ाहिर – स्पष्ट

मर्म – तात्पर्य , रहस्य

पारंपरिक – परंपरा के अनुसार चलने वाली

अनपढ़ – जो पढ़ा – लिखा न हो

परदानशीं- परदा करने वाली स्त्री

बैरिस्ट्री – वकालत

विलायत- विदेश

डिग्री – उपाधि

रीति – रिवाज – तौर – तरीके

बसर करना – गुज़ारना , बिताना

इच्छा – आकांक्षा – ख्वाहिश , चाह

इज़हार करना – कहना प्रकट करना

इकलौती – अकेली

फ़िक्र- चिंता

मुँहज़ोर – बहुत बोलने वाली

लिहाज़ – शर्म , संकोच

स्वतंत्रता सेनानी – आज़ादी की लड़ाई में भाग लेने वाले

दंग – हैरान , आश्चर्यचकित

पराए – गैर , दूसरे

अजनबी – अनजान

नज़ाकत – ज़रूरत , माँग

लाज रखना- मान लेना

हुजूर में – सामने

पेश करना – उपस्थित करा देना

हैरतअंगेज़ – हैरान कर देने वाला

फरमाबरदार – आज्ञाकारी

आज़ादी का सिपाही – स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ अर्पित कर देने वाला

बेखबर – अनजान

जुनून – पागलपन

दरअसल – वास्तव में

आज़ाद-ख्याल – स्वतंत्र विचार रखने वाली

दखल – हस्तक्षेप

उबाऊ- बोझिल , उबा देने वाला

क्रांतिकारी – स्थिति , व्यवस्था में भारी उलट – फेर कर देने वाला

होनहार – मेधावी , जिसका भविष्य उज्ज्वल प्रतीत होता हो

आई.सी.एस. – देश में प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति हेतु ली जाने वाली परीक्षा

पुश्तैनी – माता – पिता से प्राप्त , खानदानी

घेला – कम मूल्य का सिक्का

नाजुक – कोमल

छींका – दूध , दही , गोरस , मक्खन आदि की मटकी टाँगने की रस्सी

गनीमत – भलाई, कुशल

पेशकश – काम करने की पहल

वाशिंदों – रहने वालों

अभिभूत – प्रभावित , मुग्ध

जंग – युद्ध , लड़ाई

प्रशंसक- प्रशंसा करने वाला

शोहरत – प्रसिद्धि , यश

सिर करना – अपनाना , प्राप्त करना

साहबी – साहबों जैसा रोबदाब

सिरफिरा- पारंपरिक या सामाजिक नियमों से हटकर काम करने वाला

रोमांचक – रोमांचित करने वाली

परिकथा – परियों की कहानी

सनकभरी – जिंद या पागलपन युक्त

ख्वाहिश – इच्छा , रुचि

रज़ामंदी – स्वीकृति

उपकथा – कहानी के बीच की छोटी कहानी

तिलिस्म – जादू

गाढ़ा बनाना – प्रभाव बढ़ा देना

शख्सियत – व्यक्तित्व

नज़ाकत – कोमलता

गैर-दुनियादारी – छल – कपट से दूर

निष्पक्षता- किसी एक का पक्ष न लेने का भाव

परीजात – परियों की जाति से अर्थात परियों जैसी

जादुई – विचित्र

पत्थर की लकीर – अकाट्य या अटल

जुमला – वाक्य

ममतालू – ममतामयी

परवरिश – पालन – पोषण , देखभाल

मुस्तैद – तत्पर

जिठानियाँ – पति के बड़े भाइयों की पत्नियाँ

मर्दजात – पुरुष जाति के

नाम धरना – उपहास हेतु किसी उपनाम से बुलाना

अपेक्षा – आशा , उम्मीद

प्रचारित- जिसका प्रचार किया गया हो

गोपनीय – छिपाने योग्य

जाहिर करना – कहना या प्रकट करना

बखूबी निभाना – अच्छी तरह पूरा करना

बेहाल – बेचैन , व्याकुल

उबरना – मुक्ति पाना

निजत्व बनाना – अपनी मर्जी से काम करना

हवाले होना – समर्पित होना

लीक – पारंपरिक तरीके , बँधी बधाई परंपराएँ

पूर्वजों- पुरखे

गनीमत- ठीक , कुशल

व्रत लेना- ठान लेना , निश्चित कर लेना

फ़जल – अनुग्रह , दया

अपरिग्रह – संग्रह न करना

बिरादरी- जाति

हरकत – गलत काम , अनुचित क्रियाकलाप

मन्नत – दुआ , ईश्वर से कुछ माँगना

गैर – वायती – जो परंपरा में न हो , अप्रचलित

पोशीदा – परदे में ढँके रहना

सरेआम – सबके सामने

ऐलान करना – जोर से कहना , घोषणा करना

मुँह खुला का खुला रहना – हक्का – बक्का या आश्चर्यचकित रह जाना

फ़ितूर – पागलपन

वाजिब – उचित

पुश्तों – पीढ़ियों

पुण्य – अच्छे कर्मों का फल

सफाई देना – कारण बताना या अपनी बात के समर्थन में कुछ कहना

बदस्तूर – नियमपूर्वक

तार जुड़ा होना – संबंध होना

तथास्तु – ऐसा ही हो अर्थात इच्छा पूर्ण हो

मर्तबा – बार, दफा

आरजू – इच्छा

रंग लाना – प्रभाव या असर दिखाना

गैरवाजिब – अनुचित

जुस्तजू – प्रार्थना, निवेदन

अफरा – तफरी में आना – हड़बड़ी में आ जाना

होश सँभालना – समझदार होना

दीदार – दर्शन

खुशनसीबी – सौभाग्य

हाथ आना – मौका मिलना

रतजगा – रात में जागकर उत्सव मनाने का कार्यक्रम

सेंध लगाकर – दीवार काटकर

बदकिस्मत – दुर्भाग्यशाली

जुगराफ़िया- भूगोल का ज्ञान, नक्शा

पुरखिन – वृद्धा

दबे पाँव आना- चुपचाप आना

आहट – आवाज़

इतमीनान – तसल्ली, विश्वास

असंगत – बेमेल

टटोलना – उँगलियों से छूकर पता लगाना

धर्मसंकट – ऐसी स्थिति जिसमें धर्मपालन करना कठिन हो

बिगाड़ियो – बिगाड़ना , नष्ट करना

हटाइयो- हटाना

धरा है- उपस्थित है

अकबकाया – घबराया

एहतियात – सावधानी

रोमांचक – मज़ेदार

भलामानुस – सभ्य , भला मनुष्य

विरासत – उत्तराधिकार में मिली संपत्ति

हीन भावना – कमज़ोर मानने की भावना

उपजी – पैदा हुई

रोमानी – भावनाओं से भरपूर

जश्न- समारोह , उत्सव

दुर्योग – बुरे समय के कारण

जानलेवा – घातक

शिरकत करना – शामिल होना

इज़ाज़त – अनुमति

सत्ताधारी – शासन करने वाले

चुप्पी साधना – चुप हो जाना

बदस्तूर – पारंपरिक ढंग से

कलपना – दुखी होना

बहलना – ध्यान बँट जाना

मिराक – मानसिक रोग

पलायन करना- अन्यत्र चले जाना

मोहलत –फुर्सत , छुट्टी

गड्डमड्ड होना –आपस में घुल – मिल जाना

पल्ले पड़ना – समझ में आना

अनाचार – दुर्व्यवहार

कंठस्थ होना- जुबानी याद होना

बरकरार रखना – बनाए रखना

अवतार होना – प्रकट होना

आड़े आना – बाधक बनना

नारीवाद – नारी के अधिकारों को महत्व देने का आंदोलन

पोंगापंथी – मूर्खतापूर्ण कार्य करने वाले

घरघुस्सू – रूढ़िवादी, बाहरी दुनिया से मतलब न रखने वाला

हजम करना – पचाना , सहन करना

आलोचना-बुद्धि – गुण – दोष की बातें करने वाले लोग

दो – चार होना – सामना करना

नतीजन – परिणामस्वरूप

सवा सेर होना – अधिक प्रभावी होना

आलम – अवस्था , हालत

सामंतशाही – राजाओं या शासकों की आदत

प्रतीक – निशान , चिह्न

फारिग – कार्य से निवृत्त

उदासीन – तटस्थ , विमुख

कुढ़ना – भुनना – मन – ही – मन खिन्न होना

खरामा-खरामा – धीरे – धीरे

रुतबा – प्रभाव

विश्वसनीय – विश्वास करने के योग्य

कुतर्क – गलत तर्क , बलपूर्वक अपनी बात कहना

इत्र – खुशबूदार द्रव्य

दिलचस्पी – शौक

शागिर्द – शिष्य , सीखने वाले

वाकिफ़ – परिचित

हथियार डाल देना – हार मान लेना

रोग लगा लेना – समर्पित हो जाना

कायम रखना – बनाए रखना

कगार – किनारा

प्रयोजन – उद्देश्य , मतलब

सिद्ध न होना – पूरा न होना

शौकीन – रुचि रखने वाला/वाली

राहत कोष – लोगों की सहायता के लिए जुटाया गया धन

दरख्वास्त – प्रार्थना , अनुरोध

विशप- पादरी

क्रिश्चियन – ईसाई

इसरार – आग्रह

बशर्ते – शर्त के साथ

कडुवी – अच्छी न लगने वाली

सौ फीसदी सच – पूरी तरह सच

मान्यता – मंजूरी , स्वीकृति

खिसके – बगावती , विद्रोही

व्रत – संकल्प , दृढ़ इरादा

ख्यात- प्रसिद्ध

नमूना – उदाहरण

पेश करना – दिखाना

मुकाबिल- बराबरी

खासियत – विशेषता

कयामती – प्रलयंकारी

माकूल – मुनासिब , अच्छा

गनीमत – कुशलता , भलाई

एकमुश्त – एक साथ

मलाल – दुख , अफसोस

रोमांच – रोएँ खड़े हो जाना

लब-लब करना – पूरी तरह भरा होना

धुन – लगन

मंज़िल – लक्ष्य , उद्देश्य

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