NCERT Class 10 Hindi Kshitij Chapter 12 Summary लखनवी अंदाज़

NCERT Class 10 Hindi Kshitij Chapter 12 Summary लखनवी अंदाज़

Hindi Kshitij Chapter 12 Summary लखनवी अंदाज़

NCERT Class 10 Hindi Kshitij Chapter 12 Summary लखनवी अंदाज़, (Hindi) exam are Students are taught thru NCERT books in some of the state board and CBSE Schools. As the chapter involves an end, there is an exercise provided to assist students to prepare for evaluation. Students need to clear up those exercises very well because the questions inside the very last asked from those.

Sometimes, students get stuck inside the exercises and are not able to clear up all of the questions.  To assist students, solve all of the questions, and maintain their studies without a doubt, we have provided a step-by-step NCERT Summary for the students for all classes.  These answers will similarly help students in scoring better marks with the assist of properly illustrated Notes as a way to similarly assist the students and answer the questions right.

NCERT Class 10 Hindi Kshitij Chapter 12 Summary लखनवी अंदाज़

 

पाठ की रूपरेखा

लेखक ने उस सामंती वर्ग की बनावटी जीवन – शैली पर कटाक्ष किया है , जो वास्तविकता से बेख़बर कृत्रिम जीवन जीने में विश्वास करता है । ऐसा वर्ग सामान्य जनजीवन से कोसों दूर रहते हुए स्वयं को विशिष्ट श्रेणी का सदस्य मानता है । ऐसा नहीं है कि आज समाज में सामंती वर्ग या उस मानसिकता के व्यक्ति नहीं हैं । वे तो हर काल में रहते आए हैं । आज के समय में भी इस परजीवी संस्कृति ( सामंती वर्ग की बनावटी शैली ) के वाहकों को समाज में देखा जा सकता है । प्रस्तुत व्यंग्य इस बात को प्रमाणित करने के लिए लिखा गया है कि बिना किसी विचार के कहानी नहीं लिखी जा सकती , लेकिन इसे अवश्य ही एक स्वतंत्र एवं मौलिक रचना के रूप में पढ़ा जा सकता है ।

 

पाठ का सार

सेकंड क्लास का टिकट लेने का उद्देश्य

लेखक कोई नई कहानी लिखने हेतु व उस विषय के बारे में सोचने के लिए एकांत चाहता था । इसलिए उसने सेकंड क्लास का टिकट ले लिया । साथ ही , उसकी इच्छा यह भी थी कि वह रेल की खिड़की से मार्ग में आने वाले प्राकृतिक दृश्यों को देखकर कुछ सोच सके ।

डिब्बे में नवाब साहब की उपस्थिति

जिस डिब्बे में लेखक चढ़ा , उसमें पहले से ही एक नवाब साहब पालथी मारे बैठे हुए थे । उनके सामने दो ताज़े खीरे तौलिए पर रखे हुए थे । लेखक के उस डिब्बे में चढ़ने पर नवाब साहब ने कोई उत्साह नहीं दिखाया । लेखक को लगा कि नवाब साहब उसके इस डिब्बे में आने से इसलिए खुश नहीं हैं , क्योंकि किसी सफ़ेदपोश के सामने खीरे जैसी साधारण खाद्य सामग्री खाने में उन्हें संकोच हो रहा था ।

लेखक , नवाब साहब और खीरा

जब बहुत देर हो गई तो नवाब साहब को लगा कि वह खीरे किस प्रकार खाएँ तब हारकर उन्होंने लेखक को खीरा खाने का निमंत्रण दिया , जिसे लेखक ने धन्यवाद सहित ठुकरा दिया ।

लेखक द्वारा खीरा खाने के लिए मना करने पर नवाब साहब ने खीरों के नीचे रखे हुए तौलिए को झाड़कर सामने बिछाया , सीट के नीचे से लोटा उठाकर दोनों खीरों को खिड़की से बाहर धोया और तौलिए से पोंछ लिया । इसके बाद ज़ेब से चाकू निकालकर दोनों खीरों के सिर काटे , उन्हें घिसकर उनका झाग निकाला और बहुत एहतियात ( सावधानीपूर्वक ) से छीलकर खीरों की उन फाँकों को करीने से तौलिए पर सजाया । यह सब करने के बाद उन्होंने उन फाँकों पर जीरा – मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरक दी । यह सब देखकर लेखक एवं नवाब साहब दोनों के मुँह में पानी आ रहा था ।

नवाब साहब का खीरा खाने का विशिष्ट ढंग

यह सब करने के बाद नवाब साहब ने एक बार फिर से लेखक को खीरा खाने का निमंत्रण दिया । खीरा खाने की इच्छा होते हुए भी लेखक ने नवाब साहब का प्रस्ताव यह कहकर ठुकरा दिया कि उनका मेदा कमज़ोर है ।

तब नवाब साहब ने फाँकों को सूँघा , स्वाद का आनंद लिया और उन फाँकों को एक – एक करके खिड़की से बाहर फेंक दिया । इसके बाद लेखक की ओर देखते हुए तौलिए से हाथ और होंठ पोंछ लिए । लेखक को लगा जैसे वह उससे कह रहे हैं कि यह है खानदानी रईसों का तरीका ! इसके बाद लेखक को नवाब साहब के मुँह से भरे पेट की ऊँची डकार का स्वर भी सुनाई दिया

‘ नई कहानी ‘ का आधार

यह सब देखकर लेखक सोचने लगा कि जब खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना मात्र से पेट भर जाने की डकार आ सकती है , तो बिना विचार , घटना और पात्रों के लेखक की इच्छा मात्र से ‘ नई कहानी ‘ क्यों नहीं बन सकती ।

 

शब्दार्थ

मुफ़स्सिल – नगर के इर्द – गिर्द के स्थान

उतावली – जल्दबाज़ी

फूँकार – सीटी की आवाज़ निकालना

एकांत – अकेला

नई कहानी – वर्ष 1960 के आस – पास लिखी गई कहानी

प्रतिकूल – विपरीत

निर्जन – खाली

सफ़ेदपोश – भला इंसान

पालथी मारे- टाँगें मोड़कर

विघ्न – बाधा

अपदार्थ वस्तु – सामान्य चीज़

संगति – मेल – मिलाप

किफ़ायत- मितव्ययिता, समझदारी से उपयोग करना

गवारा – अरुचिकर

मँझले दर्जे- दूसरे दर्जे

कनखियों – तिरछी नज़र

आदाब – अर्ज़ – अभिवादन करने का एक ढंग

भाव – परिवर्तन – भावों का बदलना

गुमान- घमंड

लथेड़ लेना- शामिल करना

एहतियात – सावधानी

करीने से – तरीके से

बुरक दी – छिड़क दी

स्फुरण- हिलना

रसास्वादन – आनंद

प्लावित – पानी भर जाना

पनियाती – रसीली

मेदा – आमाशय

तलब महसूस होना – इच्छा होना

सतृष्ण – प्यासी

वासना – कामना / इच्छा

तसलीम – सम्मान में

सिर खम कर लेना- सिर झुकाना

तहज़ीब – सभ्यता

नफ़ासत – स्वच्छता

नज़ाकत – कोमलता

नफ़ीस – बढ़िया

एब्स्ट्रैक्ट – सूक्ष्म या अमूर्त

उदर – पेट

तृप्ति – संतुष्टि

लज़ीज़ – स्वादिष्ट

सकील- आसानी से न पचने वाला

ज्ञान – चक्षु – ज्ञानरूपी आँखें

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