Class 9 Hindi Sparsh Chapter 14 Summary अग्नि पथ

Class 9 Hindi Sparsh Chapter 14 Summary अग्नि पथ

Hindi Sparsh Chapter 14 Summary अग्नि पथ

Class 9 Hindi Sparsh Chapter 14 Summary अग्नि पथ, (Hindi) exam are Students are taught thru NCERT books in some of the state board and CBSE Schools. As the chapter involves an end, there is an exercise provided to assist students to prepare for evaluation. Students need to clear up those exercises very well because the questions inside the very last asked from those.

Sometimes, students get stuck inside the exercises and are not able to clear up all of the questions.  To assist students, solve all of the questions, and maintain their studies without a doubt, we have provided a step-by-step NCERT Summary for the students for all classes.  These answers will similarly help students in scoring better marks with the assist of properly illustrated Notes as a way to similarly assist the students and answer the questions right.

Class 9 Hindi Sparsh Chapter 14 Summary अग्नि पथ

 

पाठ का सार

‘ अग्नि पथ ‘ हरिवंशराय बच्चन द्वारा रचित एक उद्बोधनात्मक कविता है । इस कविता में कवि ने मनुष्य को यह प्रेरणा दी है कि जीवन एक संघर्ष है इसलिए इससे घबराकर भागना नहीं चाहिए बल्कि संघर्षों का सामना करते हुए निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए । कवि जीवन को अग्नि – भरा मार्ग मानता है । संसार में कठिनाइयाँ ही कठिनाइयाँ हैं । मनुष्य को चाहिए कि वह न तो इनसे घबराएँ , न अपना मुँह मोड़े , बल्कि निरंतर संघर्ष करता रहे । किसी से सहारे की माँग न करे । अपनी मंजिल की ओर बिना थकान महसूस किए बढ़ते रहना चाहिए । आँसू , पसीने और रक्त से लथपथ होकर भी कर्मठ मनुष्य निरंतर अपने पथ पर आगे ही बढ़ता जाता है । ऐसा कर्मवीर ही अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है । ऐसे संघर्षशील मनुष्य का जीवन ही सफल होता है ।

भावार्थ

1. अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !

वृक्ष हों भले खड़े ,

हों घने , हों बड़े ,

एक पत्र – छाँह भी माँग मत , माँग मत , माँग मत !

अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !

शब्दार्थ-

अग्नि पथ – कठिनाइयों से भरा मार्ग

वृक्ष – पेड़

घने – अधिक मात्रा में

छाँह – छाया ।

भावार्थ- कवि सुखों का त्यागकर जीवन की चुनौतियों को स्वीकारने की प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि यह जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ है । संघर्षों से भरा हुआ हे मनुष्य ! तुम्हें रास्ते में भले ही वृक्ष खड़े दिखाई दें , लेकिन तू एक पत्ते के बराबर भी छाया की माँग मत कर । तुम्हें कठिनाइयों भरे रास्ते पर निरंतर संघर्ष करते हुए चलते चले जाना चाहिए । यह जीवन अग्नि पथ के समान है । इसकी कठिनाइयों को स्वीकार करना चाहिए ; तभी मंजिल तुम्हारे कदम चूमेगी ।

शिल्प – सौंदर्य

1. मनुष्य से दुखों को सहन करने व चुनौतियों का सामना करने का आग्रह किया गया है ।

2. खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है ।

3. भाषा में लयात्मकता व गीतात्मकता है ।

4. भाषा सरल , सरस व रोचक है ।

5. भावात्मक एवं संबोधनात्मक शैली का प्रयोग हुआ ।

6. शब्दों की आवृत्ति में ध्वन्यात्मक सौंदर्य निहित है ।

7. ‘ माँग मत , माँग मत माँग मत ‘ में अनुप्रास व पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है ।

 

2. तू न थकेगा कभी !

तू न थमेगा कभी !

तू न मुड़ेगा कभी ! कर शपथ , कर शपथ , कर शपथ !

अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !

शब्दार्थ –

शपथ – कसम

थकेगा – शिथिल होगा

थमेगा- रुकेगा

भावार्थ – कवि संघर्षमय जीवन को अग्नि पर चलने के समान पथ मान रहे हैं । व्यक्ति को कर्मठतापूर्वक आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कवि कहते हैं कि हे मनुष्य ! तेरे सामने कठिनाइयों से भरा संसार है परंतु तू इससे घबरा मत ! तुम जीवन रूपी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए कहीं पीछे मुड़कर नहीं देखोगे ; कभी थकोगे नहीं और कभी भी रास्ते में नहीं रुकोगे । तुम शपथ लो कि तुम मार्ग पर निरंतर चलते रहोगे , क्योंकि जीवन का रास्ता अग्नि रूपी कठिनाइयों से भरा है ।

शिल्प – सौंदर्य –

1. मनुष्यों को संसार की कठिनाइयों से जूझने की प्रेरणा दी गई ।

2. खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है ।

3. भाषा में लयात्मकता व गीतात्मकता है ।

4. भाषा सरल , सरस व रोचक है ।

5. भावात्मक व संबोधनात्मक शैली का प्रयोग किया गया है ।

6. शब्दों की आवृत्ति में ध्वन्यात्मक सौंदर्य निहित है ।

7. ‘ कर शपथ , कर शपथ ‘ में अनुप्रास व पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का प्रयोग हुआ है ।

 

3. यह महान दृश्य है

चल रहा मनुष्य है

अश्रु- स्वेद रक्त से लथपथ , लथपथ , लथपथ !

अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !

शब्दार्थ

अश्रु – आँसू

स्वेद – पसीना

लथपथ – सना हुआ

भावार्थ – कवि मनुष्य को संबोधित करते हुए कहता है कि हे मनुष्य ! यह संसार अग्नि भरे रास्ते के समान कठिन है । इस कठिन मार्ग पर सबसे सुंदर दृश्य यही हो सकता है कि मनुष्य अपना खून पसीना बहाते हुए संघर्ष रूपी अग्नि पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे । पसीने व रक्त की बूँदों से वह लथपथ है । परिश्रम से टपका हुआ पसीना उसकी कर्मठता का बोध करा रहा है । सामने कठिनाइयों से भरा मार्ग है । फिर भी मनुष्यों को चलते चले जाना है ।

शिल्प – सौंदर्य –

1. इस पद्यांश में संघर्षशील मनुष्य का प्रभावशाली वर्णन है ।

2. खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है ।

3. भाषा में लयात्मकता व गीतात्मकता है ।

4. भाषा सरल , सरस व रोचक है ।

5. भावात्मक व संबोधनात्मक शैली का प्रयोग किया गया है ।

6. शब्दों की आवृत्ति में ध्वन्यात्मक सौंदर्य निहित है ।

7. तत्सम शब्दों का प्रयोग हुआ है ।

8. ‘ लथपथ , लथपथ , लथपथ ‘ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है ।

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