NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 17 साँस-साँस में बाँस

Class 6 Hindi Vasant Chapter 17 साँस-साँस में बाँस

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 17 साँस-साँस में बाँस कुछ में एनसीईआरटी की किताबों के माध्यम से छात्रों को पढ़ाया जाता है ।  के रूप में अध्याय एक अंत शामिल है, वहां एक अभ्यास के लिए छात्रों को मूल्यांकन के लिए तैयार सहायता प्रदान की है ।  छात्रों को उन अभ्यासों को बहुत अच्छी तरह से स्पष्ट करने की जरूरत है क्योंकि बहुत पिछले उन लोगों से पूछा भीतर सवाल ।

कई बार, छात्रों के अभ्यास के भीतर अटक जाते है और सवालों के सभी स्पष्ट करने में सक्षम नहीं हैं ।  छात्रों की सहायता करने के लिए, सभी प्रश्नों को हल करने और बिना किसी संदेह के अपनी पढ़ाई को बनाए रखने के लिए, हमने सभी कक्षाओं के लिए छात्रों के लिए स्टेप एनसीईआरटी सॉल्यूशंस द्वारा कदम प्रदान किए हैं।  इन उत्तरों को इसी तरह छात्रों की सहायता और सवालों का सही जवाब देने के तरीके के रूप में ठीक से सचित्र समाधानों की सहायता से बेहतर अंक स्कोरिंग में छात्रों की मदद मिलेगी ।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 17 साँससाँस में बाँस

Class 6 Hindi Vasant Chapter 17 साँस-साँस में बाँस

प्रश्नअभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

निबंध से 

प्रश्न 1.
बाँस को बूढ़ा कब कहा जा सकता है। बँढे बाँस में कौन सी विशेषता होती है जो युवा बाँस में नहीं पाई जाती?
उत्तर
तीन वर्ष तक की ऊपर की आयु वाले बाँस को बूढ़ा बाँस कहा जा सकता है। बूढ़े बाँस की विशेषता यह है कि वह बहुत सख्त होता है और जल्दी टूट जाता है। जबकि युवा बॉस मुलायम होती है। उसे सामान बनाने के लिए किसी भी तरह मोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 2.
बाँस से बनाई जाने वाली चीज़ों में सबसे आश्चर्यजनक चीज़ तुम्हें कौन सी लगी और क्यों?
उत्तर
बॉस से बनाई जाने वाली चीज़ों में सबसे आश्चर्यजनक मुझे मछली पकड़ने वाला जाल ‘जकाई’ लगा। इसकी बुनावट अत्यंत कठिन लगती है और इसमें मछलियाँ जिस तरह हँसाई जाती हैं, वह भी बहुत आश्चर्यजनक है।

प्रश्न 3.
बॉस की बुनाई मानव के इतिहास में कब आरंभ हुई होगी?
उत्तर
बॉस की बुनाई मानव इतिहास में तब प्रारंभ हुई होगी, जब मनुष्य घूम-घूम कर भोजन एकत्र किया करता था। भोजन एकत्र करने के लिए किसी डलियानुमा वस्तु की जरूरत महसूस होने पर उसने बाँस की बुनाई शुरू की होगी और बाद में धीरे-धीरे इससे और भी कलात्मक चीजें बनाना शुरू किया होगा।

प्रश्न 4.
बाँस के विभिन्न उपयोगों से संबंधित जानकारी देश के किस भू-भाग के संदर्भ में दी गई है? एटलस में देखो।
उत्तर
बाँस भारत के कई हिस्सों में बहुतायत में होता है विशेषतः उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के सात राज्यों में। इन राज्यों के नाम हैं-अरुणांचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा।

निबंध से आगे

प्रश्न 1.
बाँस के कई उपयोग इस पाठ में बताए गए हैं, लेकिन बाँस के उपयोग का दायरा बहुत बड़ा है। नीचे दिए गए शब्दों की मदद से तुम इस दायरे को पहचान सकते हो

  1. संगीत
  2. प्रकाशन
  3. एक नया संदर्भ
  4. मच्छर
  5. फर्नीचर

उत्तर

  1. संगीत  –  संगीत के लिए विभिन्न आकार-प्रकार की बाँसुरियाँ बनाई जाती हैं।
  2. मच्छर  –  मच्छरदानी लगाने के लिए बाँस की छड़ी बनाई जाती है।
  3. प्रकाशन  –  प्रकाशन के लिए बाँस से कागज बनाया जाता है।
  4. फर्नीचर  –  घर को सजाने के लिए बाँस का फर्नीचर बनाया जाता है।
  5. एक नया संदर्भ  –  बॉस से बरतन, औजार, टोकरी, मकान, टोपी, अचार इत्यादि बनाए जाते हैं।

प्रश्न 2.
इस लेख में दैनिक उपयोग की चीजें बनाने के लिए बाँस का उल्लेख प्राकृतिक संसाधन के रूप में हुआ है। नीचे दिए गए प्राकृतिक संसाधनों से दैनिक उपयोग की कौन-कौन सी चीजें बनाई जाती हैं
प्राकृतिक संसाधन दैनिक उपयोग की वस्तुएँ
 चमड़ा
 घास के तिनके
 पेड़ के छाल
 गोबर
 मिट्टी
इनमें से किन्हीं दो या दो प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए कोई एक चीज़ बनाने का तरीका अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर
चमड़ा  –  जूता, बैग, पर्स, बेल्ट, जैकेट, बहुमूल्य वस्तुओं की कवर आदि।
घास के तिनके  –  चटाई, खिलौना, टोकरी इत्यादि।
गोबर  –  उपले, घर की लिपाई-पुताई, खाद, इत्यादि।
पेड़ की छाल  –  कागज, अगरबत्ती, वस्त्र इत्यादि।
मिट्टी  –  बरतन, मकान, खिलौना, गुल्लक, इत्यादि।

प्रश्न 3.
जिन जगहों की साँस में बाँस बसा है, अखबार और टेलीविजन के ज़रिये उन जगहों की कैसी तसवीर तुम्हारे मन में बनती है?
उत्तर
साँस में बाँस बसे होने का अर्थ है बॉस पर ही जीवन निर्भर होना। इस बात को समझने के लिए हमें उन जगहों की यात्रा करनी होगी जहाँ बाँस का उद्योग फल-फूल रहा है। उनके इलाकों में हर तरफ बॉस के झुरमुट या बाड़ियाँ नजर आती हैं। लोग बॉस के बने घरों में रहते हैं, बाँस की बनी टोपियाँ पहनते हैं। उनके फर्नीचर, बरतन, औजार और कुछ खाद्य पदार्थ भी बाँस के बने होते हैं। बाँस पर ही उनका रोजगार भी टिका है। बाँस की बनी वस्तुएँ वे बाजार में बेचते हैं, जैसे-टोकरी, जाल, चटाई, खिलौने आदि। उनके घरों के आस-पास बाँस की चीरी हुई खपच्चियाँ बिखरी दिखाई देती हैं। अगर बाँस न हो, तो उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। वे अपनी अधिकांश आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बाँस पर निर्भर रहते हैं।

अनुमान और कल्पना

इस पाठ में कई हिस्से हैं जहाँ किसी काम को करने का तरीका समझाया गया है। जैसेछोटी मछलियों को पकड़ने के लिए इसे पानी की सतह पर रखा जाता है या फिर धीरे-थीरे चलते हुए खींचा जाता है। बाँस की खपच्चियों को इस तरह बाँधा जाता है। कि वे एक शंकु का आकार ले लें। इस शंकु का ऊपरी सिरा अंडाकार होता है। निचले नुकीले सिरे पर खपच्चियाँ एक-दूसरे में गॅथी हुई होती हैं।
इस वर्णन को ध्यान से पढ़कर नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर अनुमान लगाकर दो। यदि अंदाज़ लगाने में दिक्कत हो तो आपस में बातचीत करके सोचो
() बॉस से बनाए गए शंकु के आकार का जाल छोटी मछलियों को पकड़ने के लिए ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
() शंकु का ऊपरी हिस्सा अंडाकार होता है तो नीचे का हिस्सा कैसा दिखाई देता
() इस जाल से मछली पकड़ने वालों को धीरे-धीरे क्यों चलना पड़ता है।
उत्तर
(क) शंकु के आकार के जाल में छोटी मछलियाँ अधिक और शीघ्रता से फँस जाती हैं। इस जाल को ‘जकाई’ कहा जाता है।
(ख) जब शंकु का ऊपरी हिस्सा अंडाकार होता है तो नीचे का हिस्सा चौड़ा दिखाई देता है।
(ग) जाल में मछलियों की संख्या अधिक होने के कारण मछलियों के भार से जाल टूट जाने का डर रहता है। इसलिए इस जाल से मछलियों को पकड़ने वालों को धीरे-धीरे चलना पड़ता है। तेज़ चलने से मछलियाँ जाल में टकराएँगी और वे वापस जलस्रोत की ओर जा सकती हैं?

शब्दों पर गौर

इन वाक्यांशों का वाक्यों में प्रयोग करो।
उत्तर

  • चित्रकार के हाथों की कलाकारी उसके चित्रों में दिखती है।
  • लगता है कि यह आड़ा-तिरछा चित्र किसी बच्चे ने बनाया है।
  • आज यहाँ घनघोर बारिश हुई है।
  • यह डलियामा टोकरी बाँस की बनी है।
  • भारत में बुनाई का सफर प्राचीन काल से चला आ रहा है।
  • आपके कहे मुताबिक मैंने अपना काम कर दिया है।

व्याकरण

प्रश्न 1.
‘बुनावट’ शब्द ‘बुन’ क्रिया में ‘आवट’ प्रत्यय जोड़ने से बनता है। इसी प्रकार नुकीला,
दबाव, घिसाई भी मूल शब्द में विभिन्न प्रत्यय जोड़ने से बने हैं। इन चारों शब्दों में प्रत्ययों को पहचानो और उनसे तीन-तीन शब्द और बनाओ। इन शब्दों का वाक्यों में भी प्रयोग करो


उत्तर
 बुन + आवट = बुनावट, ऐसे तीन अन्य शब्द
लिखावट  –  तुम्हारी लिखावट अच्छी है।
रुकावट  –  रास्ते की रुकावट से डरना नहीं चाहिए।
सजावट  –  तुम्हारे घर की सजावट बहुत अच्छी है।

 नोक + इला = नुकीला, ऐसे तीन अन्य शब्द
पथरीला  –  ऐसा पथरीला रास्ता मैंने अब तक नहीं देखा था।
चमकीला  –  यह नकली मोती अधिक चमकीला है।
भड़कीला  –  ऐसा भड़कीला वस्त्र पहनकर मंदिर जाना ठीक नहीं रहेगा।

 देब + आव = दबाव, ऐसे तीन अन्य शब्द
बहाव  –  इधर पानी का बहाव तेज है।
ठहराव  –  उसके जीवन में ठहराव आ गया है।
जमाव  –  डल झील में पानी का जमाव देखने लायक है।

 घिस + आई = घिसाई, ऐसे तीन अन्य शब्द
लिखाई  –  उसे निबंध लिखाई के पैसे मिलते हैं।
पिसाई  –  चक्की पर गेहूँ की पिसाई होती है।
रिहाई  –  आज उसकी रिहाई होने वाली है।

प्रश्न 2.
नीचे पाठ से कुछ वाक्य दिए गए हैं

  1. वहाँ बाँस की चीजें बनाने का चलन भी खूब है।
  2. हम यहाँ बाँस की एक-दो चीज़ों का ही ज़िक्र कर पाए हैं।
  3. उदाहरण के लिए आसन जैसी छोटी चीजें बनाने के लिए बाँस को हर एक गठान से काटा जाता है।
  4. खपच्चियों से तरहतरह की टोपियाँ भी बनाई जाती है।
    रेखांकित शब्दों को ध्यान में रखते हुए इन बातों को अलग ढंग से लिखो।

उत्तर

  1. वहाँ बाँस की चीजें बहुत बनती हैं।
  2. उदाहरण के लिए आसन जैसी छोटी चीजें बनाने के लिए बाँस को हर एक गाँठ से काटा जाता है।
  3. हम यहाँ बाँस की एक-दो चीज़ों की ही चर्चा कर पाए हैं।
  4. खपच्चियों से कई प्रकार की टोपियाँ बनाई जाती हैं।

प्रश्न 3.
तर्जनी हाथ की किस उँगली को कहते हैं? बाकी उँगलियों को क्या कहते हैं। सभी उँगलियों के नाम अपनी भाषा में पता करो और कक्षा में अपने साथियों और शिक्षक को बताओ।
उत्तर
अँगूठे के बगल वाली हाथ की उँगली को तर्जनी कहते हैं। बाकी उँगलियों को अंगुष्ठा, | तर्जनी, मध्यमा, अनामिको, कनिष्ठा कहते हैं।

प्रश्न 4.
अंगुष्ठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा-ये पाँच उँगलियों के नाम हैं। इन्हें पहचान कर सही क्रम में लिखो।
उत्तर

Leave a Comment