NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 मानवीय करुणा की दिव्या चमक

Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 मानवीय करुणा की दिव्या चमक

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 मानवीय करुणा की दिव्या चमक, (हिंदी)परीक्षा में राज्य बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों में से कुछ में एनसीईआरटी की किताबों के माध्यम से छात्रों को पढ़ाया जाता है के रूप में अध्याय एक अंत शामिल है, वहां एक अभ्यास के लिए छात्रों को मूल्यांकन के लिए तैयार सहायता प्रदान की है छात्रों को उन अभ्यासों को बहुत अच्छी तरह से स्पष्ट करने की जरूरत है क्योंकि बहुत पिछले उन लोगों से पूछा भीतर सवाल

कई बार, छात्रों के अभ्यास के भीतर अटक जाते है और सवालों के सभी स्पष्ट करने में सक्षम नहीं हैं छात्रों को सभी प्रश्नों को हल करने और अपनी पढ़ाई को संदेह के साथ बनाए रखने में सहायता करने के लिए, हमने सभी कक्षाओं के लिए छात्रों के लिए स्टेप एनसीईआरटी सॉल्यूशंस द्वारा कदम प्रदान किए हैं। इन उत्तरों को इसी तरह छात्रों की सहायता और सवालों का सही जवाब देने के तरीके के रूप में ठीक से सचित्र समाधानों की सहायता से बेहतर अंक स्कोरिंग में छात्रों की मदद मिलेगी

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 मानवीय करुणा की दिव्या चमक

Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 मानवीय करुणा की दिव्या चमक

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

 

प्रश्न 1. फादर की उपस्थिति देवदारु की छाया जैसी क्यों लगती थी ?

उत्तर – फ़ादर की उपस्थिति देवदारु की छाया जैसी इसीलिए लगती थी क्योंकि फादर मानवीय करुणा से ओत – प्रोत विशाल हृदय वाले और सभी के कल्याण की भावना रखने वाले महान् व्यक्ति थे । फ़ादर परिवार के बड़े व्यक्ति की तरह उन सबको अपनी छत्रछाया में रखते थे । वे उनके परिवार के उत्सवों में शामिल होते थे और उन्हें आशीषों से भर देते थे । दुःख के समय सांत्वना के वचनों द्वारा उनको शोतलता प्रदान करते ।

प्रश्न 2. फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं , किस आधार पर ऐसा कहा गया है ?

उत्तर – फादर बुल्के को भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग इसलिए कहा गया है क्योंकि वे अपनी जन्मभूमि बेल्जियम को छोड़कर भारत आकर यहाँ की संस्कृति में पूरी तरह से घुल – मिल गए थे । वे भारतीय संस्कृति के अनुरूप ही वसुधैवकुटुम्बकम् की भावना से ओत – प्रोत थे । भारतवासी ही उनके लिए सबसे अधिक आत्मीय थे । फादर सदैव यही कहते थे कि अब भारत ही मेरा देश है । उन्होंने हिंदी में पी.एच. डी . की व उसे राष्ट्रभाषा बनाने हेतु सदैव प्रयास करते रहे । उन्होंने अंग्रेजी – हिंदी कोश भी तैयार किया ।

प्रश्न 3. पाठ में आए उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिये जिससे फ़ादर बुल्के का हिन्दी प्रेम प्रकट होता है ?

उत्तर– फादर बुल्के के हिन्दी के प्रेम को हम निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट कर सकते हैं :

1 . इलाहाबाद में फादर ‘ परिमल ‘ नाम की साहित्यिक संस्था से जुड़ गए थे । से

2. फुल्दर वहाँ हिंदी भाषा व साहित्य से सम्बन्धित गोष्ठियों में शामिल होते हुए गंभीर बहस करते थे । वे लेखकों की रचनाओं पर अपनी स्पष्ट राय और सुझाव भी देते थे ।

3. फादर बुल्के ने शोध हिंदी में किया , जिसका विषय था रामकथा उत्पत्ति और विकास ।

4 . फ़ादर हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखना चाहते थे , इसकी उन्हें बहुत चिंता रहती थी । वह हर मंच पर इस चिंता को प्रकट करते तथा इसके लिए अकाट्य तर्क देते । वे हिंदीभाषी लोगों द्वारा ही हिंदी की उपेक्षा पर दुःखी हो जाते ।

5 . उन्होंने अंग्रेजी नाटक ब्लू – बर्ड का हिंदी में ‘ नील पंछी ‘ के नाम से अनुवाद किया ।

6 . राँची में हिंदी तथा संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष पद पर कार्य किया तथा बाइबिल का अनुवाद भी तैयार किया । उन्होंने अंग्रेजी – हिंदी शब्दकोश भी तैयार किया ।

प्रश्न 4. इस पाठ के आधार पर फादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए ।

उत्तर – 1. फादर बुल्के एक निष्काम कर्मयोगी थे ।

2 . उनके व्यक्तित्व में मानवीय करुणा की दिव्य चमक थी । वे अपने प्रियजनों को आशीषों से भर देते थे ।

3. फादर अपने स्नेहीजनों के व्यक्तिगत सुख – दुःख का सदा ध्यान रखते थे ।

4 . फ़ादर के सांत्वना भरे शब्दों से लोगों का हृदय प्रकाश से भर जाता था । वे अपनी महानता के कारण सभी की श्रद्धा के पात्र थे ।

5 . अपने प्रत्येक प्रियजन के लिए उनके हृदय में ममता , अपनत्व की अमृतमयी वर्षा उमड़ती रहती थी ।

प्रश्न 5. लेखक ने फादर बुल्के को ‘ मानवीय करुणा की दिव्य चमक ‘ क्यों कहा है ?

उत्तर– लेखक ने फादर बुल्के को मानवीय करुणा की दिव्य चमक इसलिए कहा है क्योंकि फ़ादर के हृदय में मानव मात्र के प्रति करुणा की असीम भावना विद्यमान थी । फ़ादर के मन में अपने प्रत्येक प्रियजन के लिए ममता और अपनत्व का भाव उमड़ता रहता था । फादर लोगों को अपने अशोषों से भर देते थे । प्रत्येक व्यक्ति के दुःख में उनके सांत्वना भरे शब्द उन व्यक्तियों को धैर्य बँधाते थे । उनको नीली आँखों की चमक में असीम वात्सल्य तैरता रहता था ।

प्रश्न 6. फादर बुल्के ने संन्यासी की परम्परागत छवि से अलग एक नयी छवि प्रस्तुत की है , कैसे ?

उत्तर– संन्यासी की परम्परागत छवि संसार से विरक्त होकर भगवान के भजन में लगे रहने की है । उसे सांसारिक वस्तुओं और लोगों के प्रति कोई अनुराग नहीं होता । संन्यासी समाज से अलग अपने आप में लोन रहता है । वह अपने तथा अन्य लोगों के सुख – दुःख से पूर्णतः निर्लिप्त रहता है , पर फ़ादर इस परम्परागत छवि से अलग एक नवीन प्रकार के संन्यासी थे । वे सांसारिक लोगों से सम्बन्ध बनाते थे और उसे निभाते थे । वे अपने प्रियजनों को ममता और अपनत्व के भाव से सदैव गले लगाने को आतुर रहते थे । इस प्रकार फादर बुल्के ने संन्यासी को परम्परागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है ।

प्रश्न 7. आशय स्पष्ट कीजिए –

( क ) नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है ।

( ख ) फादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है ।

उत्तर– ( क ) फादर बुल्के की मृत्यु पर आँसू बहाने वालों की संख्या इतनी अधिक थी कि उसे गिना नहीं जा सकता था । उस समय नमः आँखों वाले व्यक्तियों के नामों का विवरण प्रस्तुत करना बस स्याही को बर्बाद करने के समान ही था ।

( ख ) जब हम किसी उदास शान्त संगीत को सुनते हैं तो हमारा मन गहरे दुःख में डूब जाता है तथा वातावरण में गहरी निस्तब्धता सी छा जाती है और हमारी आँखें अपने आप ही नम हो जाती है , ठीक वही स्थिति फादर को याद करते समय हो जाती है ।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8. आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा ?

उत्तर – फादर बुल्के के जीवन परिचय से यह पता चलता है कि उनके मन में बचपन से ही आध्यात्म के प्रति रुचि थी । फादर को भारतवर्ष अध्यात्म के क्षेत्र में समस्त विश्व का गुरु लगा । इसीलिए उन्होंने भारत आकर सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का निर्णय लिया होगा । ऋषि – मुनियों की तपोभूमि होने के कारण भारत के प्रति उनके मन में श्रद्धा की भावना रही होगी । फादर के मन में भगवान राम में श्रद्धा की भावना रही होगी । फादर के मन में भगवान राम के उन्नत चरित्र के कारण उनके प्रति श्रद्धा – भाव रहा होगा इसीलिए फादर ने रामकथा को अपने शोध का विषय बनाया होगा अथवा उन्होंने भारत के प्राचीन गौरवपूर्ण इतिहास एवं संस्कृति से प्रभावित होकर फादर ने भारत आने का मन बनाया होगा ।

प्रश्न 9. ‘ बहुत सुन्दर है मेरी जन्मभूमि रेम्सचैपल ‘ इस पंक्ति में फादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन – सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं ? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं ?

उत्तर– उपर्युक्त पंक्ति में फादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति अपार श्रद्धा व प्रेम की भावना अभिव्यक्त होती है । हमें अपनी जन्मभूमि बहुत सुन्दर और न्यारी लगती है । यहीं रहकर , इसी मिट्टी में ही खेलकर हम बड़े हुए हैं । अत : यह धरती हमें बहुत प्रिय है और हमारी माता के समान है । इसके प्रति जो भी हमारे कर्त्तव्य है उनका हमें सदैव ध्यान रहता है ।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 10. ‘ मेरा देश भारत ‘ विषय पर 200 शब्दों का निबन्ध लिखिए ।

उत्तर – ‘ मेरा देश भारत ‘

संसार के अन्य देशों की अपेक्षा भारतवर्ष की पावन धरती की महत्ता निर्विवाद है । प्रकृति ने इस देश की धरती को अपने हाथों से सुसज्जित किया है । इस देश का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है । यहाँ को सभ्यता और संस्कृति सम्पूर्ण विश्व में अद्वितीय है । हमारा देश भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान – विज्ञान और शिल्प के क्षेत्र में अग्रणी रहा है । विश्व में अनेक देशों की सभ्यताएँ रसातल में लुप्त हो गई , परन्तु हमारी सभ्यता एवं संस्कृति आज भी विश्व के समक्ष गौरव से सिर ऊंचा किये हुए है । उर्दू के प्रसिद्ध शायर इकबाल ने ठीक ही कहा है –

यूनान , मिस्र , रोमां , सब मिट गए जहाँ से

क्या बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी ॥

मानव – सभ्यता के प्रारम्भिक चरण से ही भारत ज्ञान के क्षेत्र में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण रहा है । यहाँ के विद्वानों ने विदेशों में भी धर्म का प्रचार किया । श्री जयशंकर प्रसाद ने इसी तथ्य को निम्न पीचयों के माध्यम से स्पष्ट किया है-

हिमालय के आँगन में ,

उसे प्रथम किरणों का दे उपहार ,

उषा ने हँस अभिनन्दन किया ,

और पहनाया हीरों का हार

जगे हम लगे जगाने विश्व ,

लोक में फैला फिर आलोक

सप्त स्वर सप्त सिंधु में उठे ,

सकल संसृति हो उठी अशोक ।

भारत की पावन धरती पर ही धर्म की संस्थापना के लिए ईश्वर ने अनेक बार अवतार धारण कर सम्पूर्ण मानव जाति को दिशा दी । भगवान कृष्ण , भगवान राम , बुद्ध तथा भगवान महावीर ने अपने लोकमंगल के कार्यों द्वारा इसी धरती को गौरव प्रदान किया । भारतवर्ष के उत्तर में पर्वतराज हिमालय विराट धवल सौन्दर्य लिए हुए सजग प्रहरी के समान सुशोभित है । दक्षिण में विशाल समुद्र भारत के चरणों का निरन्तर प्रक्षालन करता है ।

हमारे देश में विभिन्न ऋतुएँ अपनी सौन्दर्यमयी आभा से जनमानस को प्रफुल्लित करती हैं । यहाँ की शस्य श्यामला धरती , सौंधी गन्ध मन को मुग्ध करने में समर्थ है । यहाँ के लोगों के पहनावे और भाषा में पर्याप्त अन्तर है , परन्तु सबकी आत्मा जैसे एक अदृश्य सूत्र में बंधी हुई है । भारतवर्ष उद्योग और शिल्प की दृष्टि से भी अत्यधिक उन्नत है । भारतवर्ष की महिमा का गान करते हुए दिनकर जी लिखते हैं –

तुझ को या तेरे नदीश गिरि

वन को नमन करने में

किसको नमन करूँ मैं । , भारत

किसको नमन करूँ में ।

कवि ने भारत को मानवता के ललाट ‘ चन्दन ‘ की संज्ञा दी है । भारत की संस्कृति की गरिमा अद्वितीय है । यहाँ का साहित्य और संगीत अनुपमेय है । वेद , गीता , महाभारत , रामचरितमानस आदि ग्रन्थरत्न भारत की अमूल्य सम्पत्ति हैं । हमें अपने देश पर अभिमान है । अन्त में प्रसिद्ध कवि जयशंकर प्रसाद के शब्दों में कहा जा सकता है –

जिए तो सदा इसी के लिए

यही अभिमान रहे , यह हर्ष

निछावर कर दें हम सर्वस्व ,

हमारा महान प्यारा भारतवर्ष ।

सचमुच ही मेरा भारत देश महान है ।

प्रश्न 11. आपका मित्र हडसन एंड्री आस्ट्रेलिया में रहता है । उसे इस बार की गर्मी की छुट्टियों के दौरान भारत के पर्वतीय प्रदेशों के भ्रमण हेतु निमंत्रित करते हुए पत्र लिखिए ।

उत्तर – आगरा । 15 / 4 / 20XX

प्रिय मित्र हडसन ,

नमस्कार !

करल ही तुम्हारा पत्र मिला । जानकर प्रसन्नता हुई कि क्विज प्रतियोगिता में तुम्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है । मेरी तरफ से बहुत बधाई । तुमने भारत के पर्वतीय प्रदेशों के बारे में जानने की इच्छा जतायी है इसीलिए मैं चाहता हूँ कि तुम्हें उनकी यात्रा करवायी जाये ताकि तुम्हें उन्हें नजदीक से देखने और जानने का अवसर मिल सके । वैसे भी इस बार पिताजी ने छुट्टियों में शिमला जाने का कार्यक्रम बनाया है । अतः तुम भी हमारे साथ चलो । तुम्हारे साथ घूमने में बहुत आनंद आयेगा । तुम शीघ्र ही भारत आने की सूचना दो ताकि तैयारी समय पर की जा सके । तुम्हारे पत्र के इतंजार में ।

तुम्हारा मित्र

रोहन

प्रश्न 12. निम्नलिखित वाक्यों में समुच्चय बोधक शब्द छाँटकर लिखिए –

( क ) तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे ।

( ख ) माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया ।

( ग ) वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे ।

( घ ) उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे दो शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर देता था जो किसी गहरी तपस्या से जनमती

( ङ ) पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था , लेकिन वे स्मृति में अक्सर डूब जाते ।

उत्तर– समुच्चयबोधक शब्द- ( क ) और ( ख ) कि ( ग ) तो ( घ ) जो ( ङ ) लेकिन ।

पाठेत्तर सक्रियता

प्रश्न 1. फादर बुल्के का अंग्रेजी – हिन्दी कोश ‘ उनकी एक महत्त्वपूर्ण देन है । इस कोश को देखिए समझिए ।

उत्तर – छात्र स्वयं करें ।

प्रश्न 2. फादर बुल्के की तरह ऐसी अनेक विभूतियाँ हुई हैं जिनकी जन्मभूमि अन्यत्र थी , लेकिन कर्मभूमि के रूप में उन्होंने भारत को चुना । ऐसे अन्य व्यक्तियों के बारे में जानकारी एकत्र कीजिए ।

उत्तर – छात्र स्वयं करें ।

प्रश्न 3 . कुछ ऐसे व्यक्ति भी हुए हैं जिनकी जन्मभूमि भारत है , लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि किसी और देश को बनाया है , उनके बारे में भी पता लगाइए । उत्तर– छात्र स्वयं करें ।

प्रश्न 4. एक अन्य पहलू यह भी है कि पश्चिम की चकाचौंध से आकर्षित होकर अनेक भारतीय विदेशों की ओर उन्मुख हो रहे हैं इस पर अपने विचार लिखिए ।

उत्तर– छात्र स्वयं करें ।

 

एनसीईआरटी सॉल्यूशंस के लाभ

एनसीईआरटी के कक्षा 10 समाधान में अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु हैं, और प्रत्येक अध्याय के लिए, प्रत्येक अवधारणा को सरल बनाया गया है ताकि उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम प्राप्त करने की संभावनाओं को याद रखना और बढ़ाना आसान हो सके। परीक्षा की तैयारी के संदर्भ यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं कि ये समाधान आपको परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद कर सकते हैं ।

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  3. ये समाधान सबसे अच्छी परीक्षा सामग्री हैं, जिससे आप अपने सप्ताह और अपनी ताकत के बारे में अधिक जानने की अनुमति देते हैं। परीक्षा में अच्छे परिणाम पाने के लिए जरूरी है कि आप अपनी कमजोरियों को दूर करें।
  4. परीक्षा में ज्यादातर प्रश्न एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों के समान तरीके से तैयार किए जाते हैं । इसलिए, छात्रों को विषय को बेहतर ढंग से समझने के लिए प्रत्येक अध्याय में समाधानों की समीक्षा करनी चाहिए।
  5. यह निशुल्क है।

कक्षा 10 परीक्षा की तैयारी के लिए टिप्स और रणनीतियां

  1. अपने पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रम की योजना बनाएं और संशोधन के लिए समय बनाएं
  2. परीक्षा की तैयारी के लिए हर बार अपनी अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए cbsestudyguru वेबसाइट पर उपलब्ध एनसीईआरटी समाधान का उल्लेख करें ।
  3. परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करने के लिए सीखना शुरू करने के लिए cbsestudyguru लर्निंग ऐप का उपयोग करें। हल और अनसुलझे कार्यों सहित पूर्ण शिक्षण सामग्री प्रदान करें।
  4. यह अपने शिक्षकों या एलेक्स (एक अल अध्ययन बॉट) के साथ परीक्षा से पहले अपने सभी संदेहों को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण है ।
  5. जब आप किसी चैप्टर को पढ़ते या पढ़ते हैं तो एल्गोरिदम फॉर्मूले, प्रमेय आदि लिखें और परीक्षा से पहले उनकी जल्दी समीक्षा करें ।
  6. अपनी अवधारणाओं को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें।
  7. आराम और उचित भोजन लें।  ज्यादा तनाव न करें।

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